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-   -   इश्क़ मुझ को दगा देता रहा (http://www.shayri.com/forums/showthread.php?t=79814)

acharya_mj 4th April 2016 08:42 PM

इश्क़ मुझ को दगा देता रहा
 
Doston ek nayi ghazal le kar haazir hua hoon jo ki chhoti behr men hai,212/212/1212. ummid karta hoon aap ko pasand aayegi

इश्क़ मुझ को दगा देता रहा
खुद को में होसला देता रहा

दर्द मुझ को मिले जो गैरो से
फिर भी सब को दुआ देता रहा

थी महोब्बत मुझे बेइंतिहा
बेवफा को वफ़ा देता रहा

ज़ख्म सब फूल बन गये, तेरी
खुशबू की हवा देता रहा

दर्द हद से बढ़ा मेरा कभी
हंसी की मैं दवा देता रहा

उम्रभर इन्तजार था तेरा
कब्र से मैं सदा देता रहा

तू न आई नसीब था मेरा
रूह को यह वजा देता रहा

ग़म तुझे कोई भी न छू शके
उन को अपना पता देता रहा


अश्क बहते रहे निगाहो से
इश्क़ का फलसफा देता रहा

regards
Manish Acharya "Manu"

Qasid 4th April 2016 10:20 PM

Quote:

Originally Posted by acharya_mj (Post 492129)
Doston ek nayi ghazal le kar haazir hua hoon jo ki chhoti behr men hai,212/212/1212. ummid karta hoon aap ko pasand aayegi

इश्क़ मुझ को दगा देता रहा
खुद को में होसला देता रहा

दर्द मुझ को मिले जो गैरो से
फिर भी सब को दुआ देता रहा

थी महोब्बत मुझे बेइंतिहा
बेवफा को वफ़ा देता रहा

ज़ख्म सब फूल बन गये, तेरी
खुशबू की हवा देता रहा

दर्द हद से बढ़ा मेरा कभी
हंसी की मैं दवा देता रहा

उम्रभर इन्तजार था तेरा
कब्र से मैं सदा देता रहा

तू न आई नसीब था मेरा
रूह को यह वजा देता रहा

ग़म तुझे कोई भी न छू शके
उन को अपना पता देता रहा


अश्क बहते रहे निगाहो से
इश्क़ का फलसफा देता रहा

regards
Manish Acharya "Manu"

Bahut umdaa peshkash Manish ji - umeed hai aapse aage bhi pur asar ghazalein sunne ko milti rahengii

khayaal rakhiyeGaa aur aate rahiYeGaa

Madhu 14 4th April 2016 10:57 PM

Quote:

Originally Posted by acharya_mj (Post 492129)
Doston ek nayi ghazal le kar haazir hua hoon jo ki chhoti behr men hai,212/212/1212. ummid karta hoon aap ko pasand aayegi

इश्क़ मुझ को दगा देता रहा
खुद को में होसला देता रहा

दर्द मुझ को मिले जो गैरो से
फिर भी सब को दुआ देता रहा

थी महोब्बत मुझे बेइंतिहा
बेवफा को वफ़ा देता रहा

ज़ख्म सब फूल बन गये, तेरी
खुशबू की हवा देता रहा

दर्द हद से बढ़ा मेरा कभी
हंसी की मैं दवा देता रहा

उम्रभर इन्तजार था तेरा
कब्र से मैं सदा देता रहा

तू न आई नसीब था मेरा
रूह को यह वजा देता रहा

ग़म तुझे कोई भी न छू शके
उन को अपना पता देता रहा


अश्क बहते रहे निगाहो से
इश्क़ का फलसफा देता रहा

regards
Manish Acharya "Manu"

Bahut khoob kalaam pesh kiya manish ji...achcha laga aapko padhna...

Aate rahiyega....

sameer'shaad' 6th April 2016 09:10 PM

Quote:

Originally Posted by acharya_mj (Post 492129)
Doston ek nayi ghazal le kar haazir hua hoon jo ki chhoti behr men hai,212/212/1212. ummid karta hoon aap ko pasand aayegi

इश्क़ मुझ को दगा देता रहा
खुद को में होसला देता रहा

दर्द मुझ को मिले जो गैरो से
फिर भी सब को दुआ देता रहा

थी महोब्बत मुझे बेइंतिहा
बेवफा को वफ़ा देता रहा

ज़ख्म सब फूल बन गये, तेरी
खुशबू की हवा देता रहा

दर्द हद से बढ़ा मेरा कभी
हंसी की मैं दवा देता रहा

उम्रभर इन्तजार था तेरा
कब्र से मैं सदा देता रहा

तू न आई नसीब था मेरा
रूह को यह वजा देता रहा

ग़म तुझे कोई भी न छू शके
उन को अपना पता देता रहा


अश्क बहते रहे निगाहो से
इश्क़ का फलसफा देता रहा

regards
Manish Acharya "Manu"


bahut hi laaawaa peshkash manu bhai.......... ek zamaane ke baad aapko padhaa bahut khushi haasil ho rahi hai..... waahhhhhh

aate raha kijiye........... likhte rahiye.....

shaad.........

bhushan 7th April 2016 11:52 PM

Waaaaah..behad umdah...
Daad kubul farmaye

Bhushan joshi

aru 10th April 2016 10:54 AM

Waah waah...bahut hee haseen shayri hai aapki......daad hee daad...

masti 19th April 2016 12:29 AM

Itna khush rehne wala, hansi mazaak karne wala shaqs itna gehra likh sakta hai pata hi nahi tha.


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