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Search: Posts Made By: Sham Kumar
Forum: Punjabi Poetry 21st October 2012, 05:47 PM
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Posted By Sham Kumar
Thanks..Infact I wrote this poem almost 35 years...

Thanks..Infact I wrote this poem almost 35 years back. I remember writing
"Bhravan Bhravan De Vand Te Likh, Sadhe Chhe Dee kilo Khand Te Likh".. the one you are refering is a modified version. ...
Forum: Punjabi Poetry 17th October 2012, 08:58 PM
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Posted By Sham Kumar
ਪ੍ਯਾਰ

ਪ੍ਯਾਰ

ਨੈਨਾ ਦੇ ਤੀਰ ਚਲਦੇ ਈ, ਘਾਯਲ ਯਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦੈ,
ਕਰਾਰ ਲਭਦਾ, ਲਭਦਾ, ਬੇਕਰਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦੈ,
ਧੜਕਨ ਤੇਜ ਹੋ ਜਾਂਦੀ, ਤੇ ਆਪੋਂ ਬਾਹਰ ਹੋ ਜਾਂਦੈ,
ਕੋਈ ਦੱਸੇ, ਐਹਨੂੰ ਈ ਕਹੰਦੇ ਨੇ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਪ੍ਯਾਰ ਹੋਜਾਂਦੈ ?

ਸ਼ਾਮਕੁਮਾਰ
Forum: Punjabi Poetry 17th October 2012, 08:57 PM
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Posted By Sham Kumar
ਪ੍ਯਾਰ

ਪ੍ਯਾਰ

ਨੈਨਾ ਦੇ ਤੀਰ ਚਲਦੇ ਈ, ਘਾਯਲ ਯਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦੈ,
ਕਰਾਰ ਲਭਦਾ, ਲਭਦਾ, ਬੇਕਰਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦੈ,
ਧੜਕਨ ਤੇਜ ਹੋ ਜਾਂਦੀ, ਤੇ ਆਪੋਂ ਬਾਹਰ ਹੋ ਜਾਂਦੈ,
ਕੋਈ ਦੱਸੇ, ਐਹਨੂੰ ਈ ਕਹੰਦੇ ਨੇ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ...
Forum: Punjabi Poetry 17th October 2012, 04:02 AM
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Posted By Sham Kumar
ਓ ਸ਼ਾਯਰ, ਨਿਕਲ ਹੁਣ ਜੁਲਫਾਂ ਦੀ ਗੁੰਝਲ ਤੋਂ ਨਿਕਲ,

ਓ ਸ਼ਾਯਰ, ਨਿਕਲ ਹੁਣ ਜੁਲਫਾਂ ਦੀ ਗੁੰਝਲ ਤੋਂ ਨਿਕਲ,

ਛਡ ਲਿਖਣਾ ਤੂੰ ਜ਼ੁਲ੍ਫ਼-ਜਵਾਨੀ ਤੇ ਛਡ,

ਛਡ ਲਿਖਣਾ ਤੂੰ ਅਖ ਮਸਤਾਨੀ ਤੇ ਛਡ,

ਛਡ ਸੋਹਨੀਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ, ਬਹਾਰਾਂ ਦੀ ਗੱਲ.

ਛਡ ਸੱਸੀ ਦੇ ਕਿੱਸੇ, ਕਰਾਰਾਂ ਦੀ ਗੱਲ,
Forum: Shayri-e-Dard 16th October 2012, 09:54 PM
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Posted By Sham Kumar
अर्ज़ कीया है-2. Arz Keeya Hai-2.

अर्ज़ कीया है-2


अपने आंसुओ को रोक लो, और दिल को संभालो,

पत्थरों के शाकिर कभी दिल नहीं होते.


Apne aansuyon ko rok lo, aur dil ko sambhalo,
Forum: Aapki Shayri 16th October 2012, 09:50 PM
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Posted By Sham Kumar
अर्ज़ कीया है-2

अर्ज़ कीया है-2


अपने आंसुओ को रोक लो, और दिल को संभालो,

पत्थरों के शाकिर कभी दिल नहीं होते.


Apne aansuyon ko rok lo, aur dil ko sambhalo,
Forum: Shayri-e-Ishq 16th October 2012, 09:46 PM
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Posted By Sham Kumar
Zara aan ke mil

zara aan ke mil



mere geeton kee mehak ho, mere zazbaat kaa dil,

shaam dhalne ko hai aayee, aa zara aan ke mil,


jab se dekha hai tumhe, raat na hai din ...
Forum: Shayri-e-Ishq 16th October 2012, 09:44 PM
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Posted By Sham Kumar
Arz keeya Hai.

Kal tak meri bahon men bahen rahee jinkee,

Aaj poochhte hain, Shakir kahan mile the hum.

*****


Log muthyon men namak leeye phirte hain,

Zakham har...
Forum: Shayri-e-Ishq 16th October 2012, 09:41 PM
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Posted By Sham Kumar
Muskurao na meri jaan nikal jaati hai.

muskurao na meri jaan nikal jaati hai.


unki sanson se vfaon kee mehak aati hai,

jaise gulshan se, fizaaon kee mehak aati
hai.


zulf lehrayen to mehke hai
Forum: Shayri-e-Dard 16th October 2012, 09:39 PM
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Posted By Sham Kumar
Bevfa dekho vfayee kee baat karte hain

bevfa dekho vfayee kee baat karte hain


bevfa dekho vfayee kee baat karte hain

jaise kafir khudayee kee baat karte hain,



hathon ko bandh kar ranjogam ke ...
Forum: Shayri-e-Dard 16th October 2012, 09:36 PM
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Posted By Sham Kumar
Nakamiyan to manzilon ke hain padao.

nakamiyan to manzilon ke hain padao.


nakaamiyaan to manzilon ke hain padao.

aansuon ko sambhaal ke rakh,

gum kee maut be bahane ke leeye,

bhla raat ko koyee ...
Forum: Aapki Shayri 16th October 2012, 09:31 PM
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Posted By Sham Kumar
Yeh shehar shehar kee baat hai.

yeh shehar shehar kee baat hai.



yeh shehar shehar kee baat hai,

koyee zehar de koyee zindagi,

koyee andhere, raat din, koyee
Forum: Aapki Shayri 16th October 2012, 09:25 PM
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Posted By Sham Kumar
Pathar ro padenge

pathar ro padenge

cheeni se lekar chritar tak, sab milaavt hai,

begaanon se lekar, mitr tak, bahut dhokhe hain,

arre, shraafat kee deevar se utha ke dekhiye parda,
...
Forum: Aapki Shayri 16th October 2012, 09:15 PM
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Posted By Sham Kumar
नाकामीआं तो मंज़िलों के हैं पड़ाओ nakamiyan to manzilon ke hain padao.

नाकामीआं तो मंज़िलों के हैं पड़ाओ


नाकामीआं तो मंज़िलों के हैं पड़ाओ,

आंसुओं को संभाल के रख,

ग़म की मौत पे बहाने के लिये,

भला रात को, कोई माई का लाल, बांध सका है,
Forum: Shayri-e-Ishq 15th October 2012, 11:28 PM
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Posted By Sham Kumar
log mutheeon mein namak leeye phirte hain, ...

log mutheeon mein namak leeye phirte hain,
zakham har kisi ko yoon hee dikhaya na karo.
शाकिर शाम कुमार
Forum: Shayri-e-Ishq 15th October 2012, 11:17 PM
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Posted By Sham Kumar
ज़रा आन के मिल

ज़रा आन के मिल


मेरे गीतों की महक हो, मेरे ज़ज्बात का दिल,

शाम ढलने को है आयी, आ ज़रा आन के मिल,


जब से देखा है तुम्हे, रात में न, दिन में फ़रक,
Forum: Shayri-e-Dard 15th October 2012, 10:51 PM
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Posted By Sham Kumar
यह शहर शहर की बात है,

यह शहर शहर की बात है,

कोई ज़हर दे कोई ज़िन्दगी,

कोई अँधेरे रात दिन, कोई कहे ले रौशनी,

यह शहर शहर की बात है,


कोई शहर तो हैं दिलजवां, कहें प्यार की ही कहानीयां,
Forum: Punjabi Poetry 14th October 2012, 11:16 PM
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Posted By Sham Kumar
ਨਾ ਫਿਕਰ ਨਾ ਫਾੱਕਾ, ਨਾ ਮੁਨ੍ਨੀ ਨਾ ਕਾੱਕਾ.

ਤੇਰੀ ਮੇਰੀ ਕਹਾਨੀ
ਨਾ ਫਿਕਰ ਨਾ ਫਾੱਕਾ, ਨਾ ਮੁਨ੍ਨੀ ਨਾ ਕਾੱਕਾ.


ਅਜ ਉਠਦੇ ਸਵੇਰੇ ਈ, ਏਹ ਧਿਆਨ ਆਇਆ ,
ਓਏ, ਏਸ ਉਮਰੇ ਸੁਰ੍ਜੀਤੇ, ਓਹ ਤੂੰ, ਕਰਨੀ ਕੀ ਮਾਇਆ,
ਤੂੰ ਬੱਚੇ ਵਿਹਾਹ ਲਾਏ, ਖੁਸ਼ ਅਪਣੇ, ਕਮੋੰ ਕਮੀਂ,
ਹੋ ਗਏ ਰਬ ਨੂੰ...
Forum: Punjabi Poetry 14th October 2012, 07:54 PM
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Posted By Sham Kumar
ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका

तेरी मेरी कहानी

ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका

अज उठदे सवेरे इ एह धियान आया,

एस उमरे सुरजीते, ओह तूँ , करनी की माया,

तूँ बच्चे विअहा लए, खुश अपने कमों कंमी,
Forum: Aapki Shayri 13th October 2012, 08:28 PM
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Posted By Sham Kumar
अर्ज़ कीया है

अर्ज़ कीया है

कल तक मेरी बाँहों में बाहें रहीं जिनकी,
आज पूछते हैं शाकिर कहाँ मिले थे हम.

*****

लोग मुठीओं में नमक लिये फ़िरते हैं,
ज़ख्म हर किसी को यूं ही दिखाया न करो.
Forum: Aapki Shayri 12th October 2012, 09:19 PM
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Posted By Sham Kumar
बेवफा देखो वफाई की बात करते हैं.

बेवफा देखो वफाई की बात करते हैं.

बेवफा देखो वफाई की बात करते हैं,

जैसे काफ़िर ख़ुदाई की बात करते हैं,

हाथों को बाँध कर, रंजोगम के दामन से,

कैसे बाज़िल हैं, हिनाई की बात करते हैं,
Forum: Aapki Shayri 12th October 2012, 09:05 PM
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Posted By Sham Kumar
मुस्कुराओ न मेरी जान निकल जाती है.

मुस्कुराओ न मेरी जान निकल जाती है.


उनकी सांसों से वफाओं की महक आती है,

जैसे गुलशन में, फिज़ाओं की महक आती है,

उनकी....

ज़ुल्फ़ लहराए तो महके है, तब्बसुम का शहर,
Forum: Aapki Shayri 12th October 2012, 12:02 AM
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Posted By Sham Kumar
दिल नहीं देते.

दिल नहीं देते.

यूं तो हम पे बहुत वो ऐतबार करते हैं,

बस बात इतनी सी ही है के, दिल नहीं देते,


रहगुज़र ले लीजीये चाहे जितना जी चाहे,

टाल गए वो मुस्कुरा, मंजिल नहीं देते,
Forum: Aapki Shayri 11th October 2012, 10:55 PM
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Posted By Sham Kumar
परेशां है ग़म

परेशां है ग़म

ऐ ज़िन्दगी दी तूनें, मोहब्बत की नेह्मतें,

शायद इसीलिये तो, परेशां है ग़म,


दिले सकून का रहा, यह तुम से वायेदा,

तब्बस्सुम बिखेरते, चलेंगे जहाँ में हम,
Forum: Aapki Shayri 11th October 2012, 06:22 PM
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Posted By Sham Kumar
ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका

ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका
अज उठदे सवेरे इ एह धियान आया,

एस उमरे सुरजीते, ओह तूँ , करनी की माया,

तूँ बच्चे विअहा लए, खुश अपने कमों कंमी,

हो गए रब्ब नू पियारे ने भापा ते मम्मी,
...
Forum: Aapki Shayri 11th October 2012, 07:42 AM
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Posted By Sham Kumar
पत्थर रो पड़ेंगे

पत्थर रो पड़ेंगे

चीनीं से लेकर चरित्र तक, सब मिलावट है,
बेगानों से लेकर, मित्र तक, बहुत धोखे हैं,
अरे शराफत की दीवार से,उठा के देखीये पर्दा,
झरोखे ही झरोखे हैं,
मोहब्बत की चादर में हैं सुराख़,...
Forum: Aapki Shayri 11th October 2012, 07:34 AM
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Posted By Sham Kumar
पत्थर रो पड़ेंगे

पत्थर रो पड़ेंगे

चीनीं से लेकर चरित्र तक, सब मिलावट है,
बेगानों से लेकर, मित्र तक, बहुत धोखे हैं,
अरे शराफत की दीवार से,उठा के देखीये पर्दा,
झरोखे ही झरोखे हैं,
मोहब्बत की चादर में हैं सुराख़,...
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