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Forum: Shayri-e-Dard 28th February 2021, 10:35 PM
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Posted By zarraa
Waahh Waah Bahaut Khoob Shaad Bhai Khoobsurat...

Waahh Waah Bahaut Khoob Shaad Bhai
Khoobsurat dard ka reshami bayaan
Forum: Ghazal Section 28th February 2021, 10:33 PM
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Posted By zarraa
maazi ko kholne par, haiN kab jawaab nikle

माज़ी को खोलने पर, हैं कब जवाब निकले
निकले सवाल ही बस, और बेहिसाब निकले

जब आफ़ताब डूबे, तब माहताब निकले
ये अपनी रोज़-ओ-शब के, लुब्ब-ए-लुबाब निकले

वो रु-ब-रु हुए हैं, हां बेहिजाब हो कर
उन के...
Forum: Shayri-e-Dard 7th February 2021, 06:55 PM
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Posted By zarraa
ruswaaiyoN se mujh ko pashemaaN na kar sake

रुसवाइयों से मुझ को पशेमां ना कर सके
दामन वो चाक कर के भी उरयां ना कर सके

ज़िन्दां में वो असीर बनाएंगे क्या भला
जो अपने घर में भी मुझे मेहमां ना कर सके

सिल तो रहे ज़बां को पे चेहरे का क्या...
Forum: Pyaar Bhari SMS Shayri 7th February 2021, 06:54 PM
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Posted By zarraa
वाह …………………………………………………………………………… वााहह

वाह …………………………………………………………………………… वााहह
Forum: Shayri-e-Dard 30th January 2021, 07:06 PM
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Posted By zarraa
Gam-e-hasTi kii inTeha hi naheeN

रास्ता ख़त्म यूं हुआ ही नहीं
जिस में मंज़िल थी वो चुना ही नहीं

ग़म-ए-हस्ती की इन्तेहा ही नहीं
और सितम ये कि इब्तिदा ही नहीं

वो कहीं बेवफ़ा ना हो जाए
वो किसी बात पर ख़फा ही नहीं

फ़ासले...
Forum: Ghazal Section 30th January 2021, 07:05 PM
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Posted By zarraa
Waah …………………………………………………………………… khoob

Waah …………………………………………………………………… khoob
Forum: Shayri-e-Dard 30th January 2021, 07:03 PM
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Posted By zarraa
Wah ……………………………………………………………… wah

Wah ……………………………………………………………… wah
Forum: Ghazal Section 24th January 2021, 09:39 AM
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Posted By zarraa
achchhi hu’i hai shaa’iri daur-e-kharaab meN

ग़ालिब कि ज़मीन और मिसरे पर कोशिश

अच्छी हुई है शाइरी दौर-ए-ख़राब में
ये वो सवाब है जो मिले बस अज़ाब में

इस मुख़्तसर सी ज़ीस्त में कितने हैं रन्ज-ओ-ग़म
बेहतर यही कि भूल हो इन के हिसाब में
...
Forum: Shayri-e-Ishq 24th January 2021, 09:36 AM
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Posted By zarraa
Waah ………………………………………………………… waah

Waah ………………………………………………………… waah
Forum: Ghazal Section 16th January 2021, 08:59 AM
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Posted By zarraa
raaz ko khola hai is andaaz meN

राज़ को खोला है इस अन्दाज़ में
जो था ज़ाहिर वो छुपाया राज़ में

आसमां में याद आया आशियां
लुत्फ़ कम होता गया परवाज़ मे

दूर ही जाते गए हैं राह भर
वरना मन्ज़िल पर थे हम आग़ाज़ में

काम सरगोशी...
Forum: Ghazal Section 16th January 2021, 08:57 AM
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Posted By zarraa
वाह …………………………………………………………………………… बहुत ख़ूब

वाह …………………………………………………………………………… बहुत ख़ूब
Forum: Shayri-e-Ishq 16th January 2021, 08:56 AM
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Posted By zarraa
Waaahhhh ……………………………………… Bahaut Khoob

Waaahhhh ……………………………………… Bahaut Khoob
Forum: Ghazal Section 4th January 2021, 07:25 AM
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Posted By zarraa
dil meN raushan umeed kar aaya

मैं सियह को सपीद कर आया
दिल में रौशन उमीद कर आया

दौर-ए-ज़ुल्मत मैं तेरा शुक्रगुज़ार
तुझ में हूं अपनी दीद कर आया

वो यक़ीं था तेरे भरोसे पर
जश्न मैं बे-नवीद कर आया

एक ही आरज़ू थी और वो भी
Forum: Ghazal Section 4th January 2021, 07:20 AM
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Posted By zarraa
वाह ………………………………………………………………………………… बहुत ख़ूब

वाह ………………………………………………………………………………… बहुत ख़ूब
Forum: Shayri-e-Ishq 4th January 2021, 07:18 AM
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Posted By zarraa
Wah …………………………………………………………… wah

Wah …………………………………………………………… wah
Forum: Shayri-e-Dard 28th December 2020, 04:01 AM
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Posted By zarraa
ye tayshuda tha ki mujh ko saza to hogi hi

ये तयशुदा था कि मुझ को सज़ा तो होगी ही
मेरी नहीं हो किसी की ख़ता तो होगी ही

ये ज़िन्दगी है इसे इस क़दर ना प्यार करो
बहुत हसीन है ये बेवफ़ा तो होगी ही

कोई हबीब नहीं है तबीब ले आओ
दुआ के जैसे...
Forum: Ghazal Section 20th December 2020, 09:03 PM
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Posted By zarraa
yooN na rasman bhala bhala kahie

दाग़ देहलवी के मिसरे और ज़मीन पर, माज़रत के साथ

यू़ं ना रस्मन भला भला कहिए
“कहिए कहिए मुझे बुरा कहिए” #
# दाग़ देहलवी का मिसरा

कितना मर मर के इस को पाया है
आब-ओ-दाने को ख़ूं-बहा कहिए

बस...
Forum: Shayri-e-Ishq 20th December 2020, 09:00 PM
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Posted By zarraa
Waaahhhh …………………………………………………… Waaahhhh

Waaahhhh …………………………………………………… Waaahhhh
Forum: Ghazal Section 20th December 2020, 08:58 PM
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Posted By zarraa
Waaahhhh ................... Bahaut Khoob

Waaahhhh ................... Bahaut Khoob
Forum: Ghazal Section 20th December 2020, 08:57 PM
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Posted By zarraa
Waaahhhh .......................... Bahaut Khoob

Waaahhhh .......................... Bahaut Khoob
Forum: Shayri-e-Dard 5th December 2020, 06:38 PM
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Posted By zarraa
hum karte gae

ज़िन्दगी से प्यार हम करते गए
और इसे दुश्वार हम करते गए

शौक़ भी पाला उमीदें भी रखीं
दिल को यूं बेज़ार हम करते गए

हाथ को कासा बना डाला मगर
सर को भी दस्तार हम करते गए

दिन को जो तामीर...
Forum: Ghazal Section 29th November 2020, 01:08 AM
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Posted By zarraa
kam kuchh bhi manzoor naheeN

प्यास में प्यासा मर जाने से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं
पीना है तो मयख़ाने से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं

करनी है तो कर लेते हैं खुल के आओ अदावत हम
ये जो नहीं तो याराने से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं

एक...
Forum: Aapki Shayri 29th November 2020, 01:05 AM
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Posted By zarraa
वाह ……………………………………………………………………… बहुत ख़ूब

वाह ……………………………………………………………………… बहुत ख़ूब
Forum: Shayri-e-Dard 22nd November 2020, 09:01 PM
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Posted By zarraa
intiha par intiha hooN kar raha

इंतिहा पर इंतिहा हूं कर रहा
जाने क्या है वो ख़ला जो भर रहा

शौक़ तो जाता रहा आग़ोश का
पीठ पे पैवस्त पर ख़ंजर रहा

देने वाले ने तो भर डाला उसे
वो मेरा दामन ही कुछ कमतर रहा

मुझ से...
Forum: Shayri-e-Ishq 22nd November 2020, 08:59 PM
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Posted By zarraa
Waah ................................ waah

Waah ................................ waah
Forum: Ghazal Section 8th November 2020, 06:35 AM
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Posted By zarraa
vahi sab kuchh dobaara ho raha hai

नई रविशों से सारा हो रहा है
वही सब कुछ दोबारा हो रहा है

तुम्हें भी नफ़अ क्या इस के अलावा
कि औरों का खसारा हो रहा है

सितम होता है क्या इस में अजब है
अजब ये है गवारा हो रहा है

हटाओ ये...
Forum: Shayri-e-Sharaab 30th October 2020, 10:11 AM
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Posted By zarraa
hum phire dar-ba-dar sharaab ke baad

सब गए अपने घर शराब के बाद
हम फिरे दर-ब-दर शराब के बाद

कैसे घुल-मिल गए हैं आपस में
शाम-ओ-लैल-ओ-सहर शराब के बाद

हो गया तेरा काम पर ऐ दोस्त
दो घड़ी तो ठहर शराब के बाद

या तो पी ले शराब...
Forum: Shayri-e-Sharaab 30th October 2020, 10:09 AM
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Posted By zarraa
waah ............. bahaut khub

waah ............. bahaut khub
Forum: Ghazal Section 28th October 2020, 09:35 AM
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Posted By zarraa
apni parwaaz ko jab thaam liya hai hum ne

अपनी परवाज़ को जब थाम लिया है हम ने
आसमानों को तह-ए-दाम लिया है हम ने

ग़ैर तो ग़ैर उसे तू भी ना पहचान सका
ऐसी शिद्दत से तेरा नाम लिया है हम ने

जिस तबीअत से है ली साहिब-ए-महफ़िल से दाद
उस...
Forum: Ghazal Section 28th October 2020, 09:33 AM
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Posted By zarraa
waah ............................ bahaut khoob

waah ............................ bahaut khoob
Forum: Shayri-e-Dard 22nd October 2020, 02:36 AM
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Posted By zarraa
kya ye sach hai ki hamsafar ham haiN

क्या ये सच है कि हमसफ़र हम हैं
या के बस तेरी रहगुज़र हम हैं

हार जाते हैं आशियाने से
वरना कहने को तो शजर हम हैं

एक बस प्यार ही की हाजत है
और उस में भी बेहुनर हम हैं

हम ने चाहा नहीं...
Forum: Shayri-e-Ishq 22nd October 2020, 02:35 AM
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Bahaut Khoob ............ waah

Bahaut Khoob ............ waah
Forum: Shayri-e-Dard 15th October 2020, 09:34 PM
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Posted By zarraa
dar-ba-dar apne ghar meN rahte haiN

हम तो दाइम सफ़र में रहते हैं
दर-ब-दर अपने घर में रहते हैं

जैसे जलते हुए मकां के मकीं
यूं किसी की नज़र में रहते हैं

महर-ओ-माह आसमान में ढूंढें
और वो बाम-ओ-दर में रहते हैं

घर की...
Forum: Shayri-e-Dard 15th October 2020, 09:33 PM
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Posted By zarraa
Waaahhhh waaahhhh ........ khoobsurat gazal

Waaahhhh waaahhhh ........ khoobsurat gazal
Forum: Shayri-e-Dard 15th October 2020, 09:32 PM
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Posted By zarraa
Waaahhhh ....................... waaahhhh

Waaahhhh ....................... waaahhhh
Forum: Shayri-e-Ishq 15th October 2020, 09:31 PM
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Posted By zarraa
Waaahhhh .................. waaahhhh

Waaahhhh .................. waaahhhh
Forum: Ghazal Section 9th October 2020, 06:35 PM
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Posted By zarraa
raaste humvaar karte hi gae

रास्ते हमवार करते ही गए
मंज़िलें मिस्मार करते ही गए

घर को वीराना बना डाला मगर
दश्त को गुलज़ार करते ही गए

सहन-ए-दिल खोला रफ़ीक़ों के लिए
वो इसे बाज़ार करते ही गए

हम ने भी दस्तक ना दी...
Forum: Ghazal Section 9th October 2020, 06:34 PM
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Posted By zarraa
Waaaahhhh ..................... khoob

Waaaahhhh ..................... khoob
Forum: Shayri-e-Ishq 9th October 2020, 06:33 PM
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Posted By zarraa
waahhh ....................... khoob

waahhh ....................... khoob
Forum: Ghazal Section 3rd October 2020, 06:48 PM
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Posted By zarraa
haalat na dekhiye mera pindaar dekhiye

हालत ना देखिये मेरा पिन्दार देखिये
दामन है तार तार तो दस्तार देखिये

ख़ल्वत में आ के पूछिये मत मुझ से मेरा हाल
मेरा तमाशा तो सर-ए-बाज़ार देखिये

जिन गेसुओं को ग़ैर पे खुलना है एक रोज़
उन को...
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