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Qasid
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Qasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant futureQasid has a brilliant future
 
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4th April 2016, 10:20 PM

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Originally Posted by acharya_mj View Post
Doston ek nayi ghazal le kar haazir hua hoon jo ki chhoti behr men hai,212/212/1212. ummid karta hoon aap ko pasand aayegi

इश्क़ मुझ को दगा देता रहा
खुद को में होसला देता रहा

दर्द मुझ को मिले जो गैरो से
फिर भी सब को दुआ देता रहा

थी महोब्बत मुझे बेइंतिहा
बेवफा को वफ़ा देता रहा

ज़ख्म सब फूल बन गये, तेरी
खुशबू की हवा देता रहा

दर्द हद से बढ़ा मेरा कभी
हंसी की मैं दवा देता रहा

उम्रभर इन्तजार था तेरा
कब्र से मैं सदा देता रहा

तू न आई नसीब था मेरा
रूह को यह वजा देता रहा

ग़म तुझे कोई भी न छू शके
उन को अपना पता देता रहा


अश्क बहते रहे निगाहो से
इश्क़ का फलसफा देता रहा

regards
Manish Acharya "Manu"
Bahut umdaa peshkash Manish ji - umeed hai aapse aage bhi pur asar ghazalein sunne ko milti rahengii

khayaal rakhiyeGaa aur aate rahiYeGaa



Qasid


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नाम-ए-वफ़ा की जफ़ा बताएं
क्या है ज़हन में क्या बोल जाएँ

रफ़्तार-ए-दिल अब थम सी गयी है
'क़ासिद' पर अब है टिकी निगाहें
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