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Shan-E-Moradabad(शान-ए-मुरादाबाद)
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Gyansaxena
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Shan-E-Moradabad(शान-ए-मुरादाबाद) - 6th September 2020, 10:32 PM

सोने सा चमकदार है पीतल से शाद है
ये शहर लाजवाब है, मुरादाबाद है

इधर को दिल्ली है तो है उधर धामपुर
वहाँ नैनीताल तो है उधर रामपुर
ये शहर-ए- जिगर है सब इसके बाद है
ये शहर लाजवाब है, मुरादाबाद है

कटघर की वो गलियाँ हों या हो बुद्ध का बाज़ार
मंडी चौक,टाउन हॉल या गंज का बाज़ार,
बिरयानी, गजक, मूँग दाल सारा याद है
ये शहर लाजवाब है, मुरादाबाद है

अदब ओ आदाब की खुशरंग महफिलें
हर नौजवान आँख में बुलंद मंज़िलें
ये बढ़े और बढ़े दिल की मुराद है
ये शहर लाजवाब है, मुरादाबाद है


ज्ञान सक्सेना
मुरादाबाद
9540667783
   
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मुरादाबाद, शान-ए-मुरादाबाद, moradabad, moradabad shayri, shan-e-moradabad

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