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Sahaj Gita Gyan - My Try
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arvindvyas
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Sahaj Gita Gyan - My Try - 1st October 2006, 12:59 PM

Sahaj Gita Gyan

Gita Sahaj Sikxa
Le lo boal boal,
Har Hari Ichchha
Jivan parikxa me
Ho satya samikxa

1
Khub mahnat ki
Par chaha na huaa
Chhoad us par sochna
Bas yahi hai sochna
Bhul use jo na huaa

Har Hari Ichchha
Jo huaa achchha huaa

2
Koshishe jari hai
Safalta hari hai
Aas pas bekari hai
Na soch jivan
dhoh raha hai
Yaad rakh
Hari lila nyari hai

Har Hari Ichchha
Jo ho raha hai
Achchha ho raha hai

3
Hari ka dhyan hoga
Lagan se kaam hoga
Sach soch ka maan hoga
Dushkarm paap saman hoga

Har Hari Ichchha
Jo hoga achchha hoga

4
Samajhna itna sa hai
Sab na samajhna sa hai
Jivan jaroori khel hai
Karm sikka uchhalne sa hai
Parinam bas maanne sa hai
Jo gaya swapan sa tha
Jo hai bas jaanne sa hai

Jo vas me nahi
Use mann me kyo boate ho

Har Hari Ichchha
Tumahra kya gaya
Jo tum roate ho

5
Khali haath aaye the
Khali haath jana hai
Dukh dard khud ka
Paida kiya tarana hai
Kuchh khoana bas
Khud se ek bahana hai
Mere pas jo hai mera hai
Vah khona nahi chahiye

Mann me kaisa
Vaham bo diya

Har Hari Ichchha
Tum kya laye the
Jo tumne kho diya

6
Janm mutyu, upajna
Nast hona
Prakruti ka niyam tha
Ho gaya
Kisi ke vas me na tha
Ho gaya

Har Hari Ichchha
Tumne kya paida kiya
Jo nast ho gaya

7
Sunya se upja,
Maa najar aaye
Kayee aur najar aaye
Riste kahlaye

Riti ko, ritu ko
Kapade pahnayee
Shadi ke jode,
Kafan pahnaye

Man知ana makan
Maan pahchan
Dhire dhire sab aaye

Mann me ghar kar gaye
Kitane saaye

Kabhi utara kabhi chadhaya
Koye na bhaya koyi aati bhaya

Har Hari Ichchha
Tumne jo liya
Yahi se liya
Jo diya
Yahi par diya

8
Kayee jamane se
Yahi par hu
Kal Ashok tha
Akbar tha
Aaj janta hu
Kal kuchh aur hoga

Har Hari Ichchha
Jo aaj tumhara hai
Kal kisi aur ka tha
Kal kisee aur ka hoga

9
Suraj ugata hai
Dhalta hai
Chaand bhadhta hai
Ghatta hai
Jivan kabhi vyarth hai
Kabhi s-arth hai
Shareer kabhi swasth hai
Kabhi roago se grasth hai

Jivan ka a地t mrutyu hai
Mrutyu ka a地t jivan hai
Jo ho raha hai
Jo dikh raha hai
Bas kam hai

Srusti a地ant hai
Honi ka na a地t hai

Har Hari Ichchha
Vayasth chinta karte ho
Parivartan hi
Srusti ka niyam hai

10

Sab Samjhya Bhujhaya
Sahayog de de lubhaya
善yas me dooba dooba
Mann maan na paya

Budhdhi bhrast huyi
Tab niyati doust huyi
Samajh le pidaye
Hai khud hi li huyi

Har Hari Ichchha
Ab soch le achchha
Karm kar le achchha




OAM TAT SAT


ARVIND VYAS 撤YAS
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Pyas
   
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20th October 2006, 03:03 AM

Bahut Sahi Gyan Diya Hai Arvind Ji

Bahut Sakun Mila Padh Kar

Jindagi Bhar Yah Saath Rahegi Hamare

Dhanyabad
   
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Sanshodhit
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arvindvyas
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Sanshodhit - 9th June 2009, 02:32 AM

संशोधित - 2008

गीता सार का आधार
गुरु का असीम आभार


गीता सहज शिक्षा
लेलो बोल बोल , हर हरि इच्छा
जीवन परीक्षा में, मिलें शुभ समीक्षा

ॐ तत सत

सत्य का साक्षात्कार है
नष्ट बस होता आकार है


मौत सत्य है, अमिट है
नष्ट होता, जो विकार है


ब्रह्माण्ड है नश्वर, अनष्ट
परिवर्तन बस साकार है


स्थिरता, अस्थिरता के
बदलाव के प्रकार है


चक्रो का बस चक्कर है
माया का अधिकार है


हर हरि इच्छा
हर में बस हरि है
हर हरि चमत्कार है
1
हरि का ध्यान होगा,
लगन से काम होगा,


सच सोच का मान होगा,
दुशकर्म पाप समान होगा,


जीवन सच्चा अच्छा होगा
हर हरि इच्छा
अब जो होगा अच्छा होगा




2
शून्य से उपजा,
माँ नजर आई,
कई और नजर आये,
रिस्ते कहलाये।


रीति को, रितु को कपडे पहनायें,
शादी के जोडे, कफन पहनायें,
मन माना मकान,
मान पहचान,
धीरे धीरे सब आये।
मन में घर कर गये,
कितने सायें,


कभी उठाया,
कभी चढाया,
कोई न भाया,
कोई अतिभाया।


हर हरि इच्छा,
तुमने जो लिया,
यहीं से लिया,
जो दिया,
यहीं पर दिया।


3
जन्म, म्रृत्यु, उपजाना
पाना, खोना, नष्ट होना,


प्रक्रुति का नियम था,
बस हो गया,
किसी के वस में ना था,
बस हो गया


दुःखी होना,
बस है पीडा पाना
सहज, सरल
जीवन गवाना


अब समझ गया
तो जीवन न गया
जीवन बस भा गया


हर हरि इच्छा,
तुमने क्या पैदा किया,
जो नष्ट हो गया।


4


खूब महनत की,
पर चाहा न हुआ,


जो भी हुआ,
बस अनचाहा हुआ


छोड उस पर सोचना,
बस यही है सोचना,


भूल उसे जो न हुआ
खेल उस्से जो है हुआ


"हर हरि इच्छा"
जो हुआ अच्छा हुआ


5
समझना इतना सा है,
सब नासमझने सा है,
जीवन जरूरी खेल है,
कर्म सिक्का ऊछालने सा है,
परिणाम बस मानने सा है.


जो गया स्वप्न सा था,
जो है बस जानने सा है,


जो वस में नहीं,
उसे मन में क्यो बोते हो,
हर हरि इच्छा,
तुम्हारा क्या गया,
जो तुम रोते हो.




ॐ तत सत
6
कुछ न अन्त है
बस अनन्त है
मृत्यु नही
सब जीवंत है
सत्य ही सत्य है
झूठ भी सत्य है
सब सत्य हरि
ब्रह्माण्ड हरि


हर हरि इच्छा
बस बोलो
हर हरि हरैया
हर दु:ख दूर करैया
हर हरि हरैया
बन सुख सूर गवैया
हर हरि हरैया
लगाये तीर नैया
हर हरि हरैया
बन ब्रह्माण्ड रचैया
7
खाली हाथ आये थे,
खाली हाथ जाना है,


दु:ख दर्द खुद का,
पैदा किया तराना है,


कुछ खोना बस,
खुद से एक बहाना है,


अब तक, यह सत्य
क्यो नहीं तुने जाना है


मेरे पास जो है मेरा है,
वह खोना नहीं चाहिये,
मन में कैसा वहम बो दिया,


हर हरि इच्छा
तुम क्या लाये थे,
जो तुमने है खो दिया.


8
कोशिशें जारी है .
सफलता हारी है.
आस पास बेकारी है.
लाचारी लाचारी है


न सोच, जीवन ढो रहा है.
जो कभी न सोचा था, वह हो रहा है


सोच अब क्या, कैसी तेरी तैयारी है
सही सोच, सही महनत
ही नियती सारी है


महनत होता हरि वरदान
यही सोच बस दुलारी है
और याद रख,
हरि लीला न्यारी है.


अब सोच "प्यास" लिऐ
क्या क्या हो रहा है
हर हरि इच्छा,
जो हो रहा है,
कल के लिये अच्छा हो रहा है.






9
कई जन्म से यहीँ पर हूँ
कल अशोक था, अकबर था,
आज जनता हूँ
कल कुछ और होउगाँ


एक सा हमैसा नहीं रहता
एक सा न भोगता, न सहता


जो तुम्हारा सत्य है वही होगा
हर हरि इच्छा
जो आज तुम्हारा है
कल किसी और का था
कल किसी और का होगा




10
जीवन अंग की प्रति है
अंग अंग में गती है


नीयत लेती रहती गती है
गती में बस नियती है


बीना गती बस दुर्गति है
कर्म जीवन सम्पती है


हर हरि इच्छा,
कर्म ही जीवन की गती है
गती ही जीवन की रती है



11
सूरज उगता है, ढलता है,
चाँद बढ्ता है, घटता है,


जीवन कभी व्यर्थ है,
कभी स-अर्थ है


शरीर कभी सवस्थ है,
कभी रोगो से ग्रस्थ है,


जीवन का अँत् म्रुत्यु है
म्रुत्य का अँत जीवन् है
जो हो रहा है
जो दिख रहा है, बस कम है


हर हरि इच्छा
व्यर्थ चिँता करते हो
परिवर्तन ही,
श्रष्टि का नियम है


12
सब समझया बुझाया
सहयोग दे दे लुभाया
"प्यास" मेँ डूबा डूबा
मन मान न पाया


जब बुद्धि भ्रष्ट हूई
तब नियती दुष्ट हूई
समझ ले पिडायेँ है
खुद की ही ली हूई


हर हरि इच्छा
अब सोच ले अच्छा
कर्म करले अच्छा


13


जीवन जीना सहज सरल हो
सुख, दुख लेना सहज सरल हो


कर्म कर फल सहज स्वीकारो
सही सही सहज सोच विचारो


सोच ले, सहजता सरलता न हो
बस शंकोच की सघनता न हो


प्रतिक्रियायें बस सहज सरल हो
प्यास पूर्ति सहज सरल हो
हर हरि इच्छा
हरि का ध्यान सरल सकल हो
अब मोक्ष भी सहज सरल हो




14
सही ज्ञान बीना कहाँ योग है
बिन नियम सय्यम सब रोग है


जो सहज मिलता वही योग है
प्रकृति के बाहर बस सब रोग है


हर हरि इच्छा
मत सोचो क्या होता योग है
तुम्हारा ही, तुमसे सही सहयोग है


15
सब सब साया सा है
बस सब माया सा है


ब्रह्माणड सत्य है
क्यो भ्रम सा है


जो तू उससा है
वह तुझसा है


हर हरि इच्छा
बस हरि आसा है
प्यास हरि प्यासा है




16
हर हरि हरैया,
हर हरि इच्छा
यहीं गीता परम
सहज शिक्षा
मन से बोलो
हर हरि इच्छा
पल पल बोलो
हर हरि इच्छा


दु:ख न करे
कभी पीछा
सुख की दे दे
हरि भिक्षा


हर हरि इच्छा
जीवन परीक्षा में
मिलें शुभ समीक्षा


17
जब वह दाता
तू क्यो फकीर
सब वह करता
तू क्यो अधीर
जग सब उसका,
कर्म तेरी जागीर
वह सुख दाता,
तू क्यो गंभीर
वह है जीवन, नही जंजीर
उसका ज्ञाता, तू तो कबीर


18
चार परम जानो
कर्तव्य पहचानो


जन्नो को मानो
पालको को मानो
पलनो को मानो


पुर्ण होना है, तो
खुद को भी मानो


हर हरि इच्छा
हरि पहचानो
मोक्ष पहचानो




हर हरि हरैया
ब्रह्माण्ड रचैया


हर हरि हरैया
दु:ख दूर करैया


हर हरि हरैया
हर घर का सैंया


हर हरि हरैया
हर दर का सिपाहियां


हर हरि हरैया
ममता लिये मैया


हर हरि हरैया
सुख सूर गवैया


हर हरि हरैया
लगाये तीर नैया


हर हरि हरैया
ब्रह्माण्ड रचैया


Pyas
   
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Dhaval
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12th September 2010, 02:46 PM

dhaynyawad aapka arvind jee!

~Dhaval


*~*Dhaval*~*....Ek Ehsaas...
   
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