Shayri.com  

Go Back   Shayri.com > Shayri > Shayri-e-Mashahoor Shayar

 
 
Thread Tools Rate Thread Display Modes
Prev Previous Post   Next Post Next
है जुस्तजू कि खूब से है ख़ूबतर कहाँ अब ठैरती
Old
  (#1)
Madhu 14
Moderator
Madhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud ofMadhu 14 has much to be proud of
 
Madhu 14's Avatar
 
Offline
Posts: 5,186
Join Date: Jul 2014
Rep Power: 24
है जुस्तजू कि खूब से है ख़ूबतर कहाँ अब ठैरती - 16th December 2016, 07:18 AM

है जुस्तजू कि खूब से है ख़ूबतर कहाँ
अब ठैरती है देखिये जाकर नज़र कहाँ

या रब इस इख़्तलात का अंजाम हो बख़ैर
था उसको हमसे रब्त मगर इस क़दर कहाँ

हम जिसपे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और
आलम में तुझसे लाख सही , तू मगर कहाँ

होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क ए इश्क़ की
दिल चाहता न हो तो ज़ुबां में असर कहाँ

इक उम्र चाहिए कि गवारा हो नीश ए उम्र
रखी है आज लज़्ज़त ए ज़ख़्म ए जिगर कहाँ

' हाली ' निशात ए नग़्मा ओ मय ढूँढते हो अब
आए हो वक़्त सुबह रहे रात भर कहाँ

"हाली" साहेब



अर्ज मेरी एे खुदा क्या सुन सकेगा तू कभी
आसमां को बस इसी इक आस में तकते रहे
madhu..
   
Reply With Quote
 

Thread Tools
Display Modes Rate This Thread
Rate This Thread:

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

BB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off

Forum Jump



Powered by vBulletin® Version 3.8.5
Copyright ©2000 - 2020, Jelsoft Enterprises Ltd.
vBulletin Skin developed by: vBStyles.com