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जीवन की भाग दौड़
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maasoom
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Thumbs up जीवन की भाग दौड़ - 4th August 2012, 12:38 PM

जीवन की भाग दौड़

दो पल को थम जाये अगर ये भागम- भाग,
दो पल को लम्बी साँस लेना चाहता हूँ!
पीपल की छांव तले दो पल,
आंखें मूँद, ये महसूस करना चाहता हूँ!
क्या ये वही रास्ता है ज़िन्दगी का,
जिस पे बरसों से चलना चाहता था!
गर ये रास्ता नहीं मेरी मजिल का,
फिर ये दोष किसपे थोपना चाहता हूँ?

जोरदार रेलम रेला, ठेला ठेली है,
भावनाओं में क्यों बहता जा रहा हूँ!
कभी फैशन, कभी रुतबा,
कभी पैसा, कभी वजूद,
मैं- मैं की झंझट में कहाँ फंसता जा रहा हूँ?
दिल में ज़ख्म हो भले ही तमाम,
कभी मज़ाक करके, कभी बनके, हँसता जा रहा हूँ!

जो सुलझाने चला उलझन तुम्हारी,
तुम्हारी जुल्फों की लटों में उलझता जा रहा हूँ!
वक़्त का कैसिनो चलता जा रहा है,
और मैं जुवारी, वक़्त खोता जा रहा हूँ
पर मंजिल है शायद कहीं पर है मेरी ,
मैं बादल हूँ, कहीं पे बरसने जा रहा हूँ!
   
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Neetu Bala
Zindagi Kaisee Hai Paheli
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4th January 2013, 07:57 PM

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Originally Posted by maasoom View Post
जीवन की भाग दौड़

दो पल को थम जाये अगर ये भागम- भाग,
दो पल को लम्बी साँस लेना चाहता हूँ!
पीपल की छांव तले दो पल,
आंखें मूँद, ये महसूस करना चाहता हूँ!
क्या ये वही रास्ता है ज़िन्दगी का,
जिस पे बरसों से चलना चाहता था!
गर ये रास्ता नहीं मेरी मजिल का,
फिर ये दोष किसपे थोपना चाहता हूँ?

जोरदार रेलम रेला, ठेला ठेली है,
भावनाओं में क्यों बहता जा रहा हूँ!
कभी फैशन, कभी रुतबा,
कभी पैसा, कभी वजूद,
मैं- मैं की झंझट में कहाँ फंसता जा रहा हूँ?
दिल में ज़ख्म हो भले ही तमाम,
कभी मज़ाक करके, कभी बनके, हँसता जा रहा हूँ!

जो सुलझाने चला उलझन तुम्हारी,
तुम्हारी जुल्फों की लटों में उलझता जा रहा हूँ!
वक़्त का कैसिनो चलता जा रहा है,
और मैं जुवारी, वक़्त खोता जा रहा हूँ
पर मंजिल है शायद कहीं पर है मेरी ,
मैं बादल हूँ, कहीं पे बरसने जा रहा हूँ!
bahot sunder
.................................................. .
   
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Hamdam
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Hamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud ofHamdam has much to be proud of
 
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20th January 2013, 01:22 PM

Zindagi ki bhag dhaur ko ek alag roop mein pesh karne ki kosh ki hai apne...

achi lagi apki yeh koshish .

sanjay sehgal



khone Pane ki daur mein yun uljha hai har bashar ,
Isee kashmeqash mein kat raha Zindagee ka safar.
   
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maasoom
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9th January 2014, 08:11 PM

Dhanyawaad Neetu Ji, Bahut Bahut Shukriya
   
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bhag-daud, busy, jeevan, life

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