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Papa Mujhe Bata do..
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sahil_violin
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Papa Mujhe Bata do.. - 15th December 2006, 08:28 PM

संसद पर हमले का आरोपी गिरफ़्तार हो चुका है और जब ये बहस ज़ोर पकड़ रही है की उससे फाँसी दी जाए या उम्रक़ैद..

आज सुबह किसी अख़बार क एक टुकड़े पैर उन्ही शहीदो में से एक के बच्चे की तस्वीर दिखाई दी.. तो कहीं खो गया.. और शायद पहुँच गया उसस बच्चे के दिल में... मालूम नही उसके दिल की आवाज़ क साथ कहाँ तक न्याय कर पाया हूँ... और शायद सब कुच्छ ग़लत भी बोल दिया हो.. लेकिन है उसस बच्चे की ही ज़ुबान में..



पापा गर तुम ज़िंदा होते...
ये सब बातें हम ना सहते..
काश उस दिन तुम जान ना खोते..
भले ही कितने ज़ख़्मी होते..

राष्ट्रा ग़ौरव की रक्षा खातिर..
तुमने खाई सीने पे गोली..
उसी ग़ौरव की आड़ में कितने..
लोगों ने अपनी फ़सलें बो ली..

तू हुआ शहिद है केहकर हूमको
सांत्वना देने आए कितने नेता..
कोई दिलवाता है वीर चक्र.
तो कोई दौलत का वादा देता..

पापा, इस दौलत से तो...
हम भूखे नंगे ही अच्छे..
देश का ग़ौरव सब कुच्छ है अपना..
हम है एक वीर के बच्चे..

काश हूमें कोई लौटा पाता..
वोह दुलार.. वोह प्यार तेरा..
काश कोई कर पाता फिर से..
आबाद उससे जो उजड़ा बसेरा..

लौटा दो हूमको घर आने का..
तेरा हैर रोज़ का वो वादा..
तेरा प्रण वो देशभक्ति का..
वोह हिम्मत वो मज़बूत इरादा..

खोया हमने है सर का साया..
मा ने खो दिया सिंदूर अपना..
आज भी मेरी नेत्रहीं दादी..
हाथो से टटोलड़ी लड़ला अपना..

जिस दुश्मण ने च्हीना ये सब..
नाम से उसके बाहें तर्रा जाती..
जिसने दी मौत तुझे अ पापा..
मौत उससे दूं इतनी ताक़त आती..

ये देश नही भूला है तुझको..
ना ही अदालत हुई है रुआंसी..
हाथ में है तेरा हत्यारा..
दे देंगे हम उसको भी फाँसी..

इतना आसान नही है पापा..
मैं भी बड़े आसमंजस में हूँ..
मैं नही कर पा रहा हूँ निस्चाय..
थोड़ी मेरी मदद कर दे तू..

माना उससे मौत मिलनी ही चाहिए..
वोह कइयों का हत्यारा है
उसने देश दरॉह किया है
उसने हम सब को लालकरा है

मगर मैने जो देखा है पापा..
लो मैं तुम्हे भी सुनाऊं..
उसका भी है एक मासूम सा बच्चा..
क्या मैं भी उससे जीवन भर रुलाऊँ..

वो दैत्या है हम मानव है
हैर काम उसका कुकर्म् है
अपने दिल में है दया का सागर..
क्षमा भी तोह हिंद का धर्म का..

मौत अगर दे डाली उसको..
वोह भी अमर ही हो जाएगा..
जिनमें मौत का दर नही उन दैत्यों में..
भगवान का दर्ज़ा वोह पाएगा..

क्या ये उचित है मुझको बता दो..
अगर हम उसको मौत ना देवें..
रखें उम्र भर कारावास में..
सबकी सेवा क काम करवें..

दें इतनी यातनायें उसको..
हर दैत्या क दिल में दर भर जावे..
मैं बहुत उलझन में हूँ..
अंगुली पकड़कर दिशा मुझे दो..
हिंद हमारा सरोपरि है
एक बार फिर से दिखला दो..

===================================


Sansad par hamle ka aaropi girftar ho chuka hai aur jab ye bahas jor pakad rahi hai ki usse faansi di jaye ya umrqaid..

aaj subah kisi akhbar k ek tukde par unhi shahido mein se ek ke bachche ki tasveer dikhai di.. to kahin kho gaya.. aur shayad pahunch gaya uss bachche ke dil mein... maloom nahi uske dil ki awaaz k saath kahan tak nyay kar paya hoon... aur shayad sab kuchh galat bhi bol dia ho.. lekin hai uss bachche ki hi jubaan mein..



Papa gar tum zinda hote...
ye sab baatein hum na sahte..
Kash us din tum jaan na khote..
bhale hi kitne jakhmi hote..

Rashtra gaurav ki raksha khatir..
tumne khayi seene pe goli..
usi gaurav ki aad mein kitne..
logon ne apni fasalein bo li..

Tu hua shahid hai kehkar humko
santvana dene aaye kitne neta..
Koi dilwata hai veer chakr.
to koi daulat ka vaada deta..

Papa, is daulat se to...
hum bhookhe nange hi achhe..
desh ka gaurav sab kuchh hai apna..
hum hai ek veer ke bachche..

kash humein koi lauta paata..
woh dulaar.. woh pyar tera..
kash koi kar paata fir se..
abaad usse jo ujda basera..

lauta do humko ghar aane ka..
tera har roz ka wo waada..
tera pran wo deshbhakti ka..
woh himmat wo majboot iraada..

khoya hamne hai sar ka saaya..
maa ne kho dia sindoor apna..
aaj bhi meri netraheen daadi..
haatho se tatoladi ladla apna..

jis dushman ne chheena ye sab..
naam se uske baahein tharra jaati..
jisne di maut tujhe a papa..
maut usse doon itni taakat aati..

ye desh nahi bhoola hai tujhko..
na hi adalat hui hai ruaansi..
haath mein hai tera hatyara..
de denge hum usko bhi faansi..

itna aasan nahi hai papa..
main bhi bade asmanjas mein hoon..
main nahi kar pa raha hoon nischay..
thodi meri madad kar de tu..

maana usse maut milni hi chahiye..
woh kaiyon ka hatyara hai..
usne desh droh kia hai..
usne hum sab ko lalkara hai..

magar maine jo dekha hai papa..
lo main tumhe bhi sunaoon..
uska bhi hai ek masoom sa bachcha..
kya main bhi usse jeewan bhar rulaoon..

wo daitya hai.. hum manav hai..
har kaam uska kukarm hai..
apne dil mein hai daya ka sagar..
kshma bhi toh hind ka dharm ka..

maut agar de daali usko..
woh bhi amar hi ho jayega..
jinmein maut ka dar nahi un daityon mein..
bhagwan ka darza woh paayega..

kya ye uchit hai mujhko bata do..
agar hum usko maut na devein..
rakhein umr bhar kaaravaas mein..
sabki sewa k kaam karawein..

dein itni yatnayein usko..
har daitya k dil mein dar bhar jave..
Main bahut uljhan mein hoon..
anguli pakadkar disha mujhe do..
hind hamara saropari hai...
ek baar fir se dikhla do..




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Location: dil mein khud ke..aisa nahi kisi ko mera pata nahi hai mujhe dhundhne ki had tak koi dhundhta nahi hai..un
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19th December 2006, 01:32 PM

पापा गर तुम ज़िंदा होते...
ये सब बातें हम ना सहते..
काश उस दिन तुम जान ना खोते..
भले ही कितने ज़ख़्मी होते..

kya baat hai. kitna sahi socha hai apne.

राष्ट्रा ग़ौरव की रक्षा खातिर..
तुमने खाई सीने पे गोली..
उसी ग़ौरव की आड़ में कितने..
लोगों ने अपनी फ़सलें बो ली..

**ek dam sahi kaha***

तू हुआ शहिद है केहकर हूमको
सांत्वना देने आए कितने नेता..
कोई दिलवाता है वीर चक्र.
तो कोई दौलत का वादा देता..

**such ye hi hota hai bas kuch din tak ke liye. phir sab shant ho jate hai.***
पापा, इस दौलत से तो...
हम भूखे नंगे ही अच्छे..
देश का ग़ौरव सब कुच्छ है अपना..
हम है एक वीर के बच्चे..

** such kaha jo apni jaan desh ke liye dete hai unhein desh ke aage kuch nahi chahiye hota.**

काश हूमें कोई लौटा पाता..
वोह दुलार.. वोह प्यार तेरा..
काश कोई कर पाता फिर से..
आबाद उससे जो उजड़ा बसेरा..

**jinhone apne kisi ko khoya ho woh hi is baat ko samjh sakte hai kyun ki dil daa mamla hai ye sabke samjh nahi aayega na..**

लौटा दो हूमको घर आने का..
तेरा हैर रोज़ का वो वादा..
तेरा प्रण वो देशभक्ति का..
वोह हिम्मत वो मज़बूत इरादा..

**wah wah...

खोया हमने है सर का साया..
मा ने खो दिया सिंदूर अपना..
आज भी मेरी नेत्रहीं दादी..
हाथो से टटोलड़ी लड़ला अपना..

**dil ko cho gai apki baat****
जिस दुश्मण ने च्हीना ये सब..
नाम से उसके बाहें तर्रा जाती..
जिसने दी मौत तुझे अ पापा..
मौत उससे दूं इतनी ताक़त आती..

***kitni badi soch hai us bache ki.***

ये देश नही भूला है तुझको..
ना ही अदालत हुई है रुआंसी..
हाथ में है तेरा हत्यारा..
दे देंगे हम उसको भी फाँसी..
** yaisa hi hona cahiye...**

इतना आसान नही है पापा..
मैं भी बड़े आसमंजस में हूँ..
मैं नही कर पा रहा हूँ निस्चाय..
थोड़ी मेरी मदद कर दे तू..

माना उससे मौत मिलनी ही चाहिए..
वोह कइयों का हत्यारा है
उसने देश दरॉह किया है
उसने हम सब को लालकरा है
** haan ye to hai***
मगर मैने जो देखा है पापा..
लो मैं तुम्हे भी सुनाऊं..
उसका भी है एक मासूम सा बच्चा..
क्या मैं भी उससे जीवन भर रुलाऊँ..

वो दैत्या है हम मानव है
हैर काम उसका कुकर्म् है
अपने दिल में है दया का सागर..
क्षमा भी तोह हिंद का धर्म का..


** kitni massom aur sahi soch****
मौत अगर दे डाली उसको..
वोह भी अमर ही हो जाएगा..
जिनमें मौत का दर नही उन दैत्यों में..
भगवान का दर्ज़ा वोह पाएगा..

** yaisa nahi hona chaiye.???***
क्या ये उचित है मुझको बता दो..
अगर हम उसको मौत ना देवें..
रखें उम्र भर कारावास में..
सबकी सेवा क काम करवें..

दें इतनी यातनायें उसको..
हर दैत्या क दिल में दर भर जावे..
मैं बहुत उलझन में हूँ..
अंगुली पकड़कर दिशा मुझे दो..
हिंद हमारा सरोपरि है
एक बार फिर से दिखला दो..

kitna satik socha haia apne sahil ji.
aaj apko pahli baat pada par dil ko choone wala likhte hai aap.
bahut sahi likha hai jajbaatoin ko us bache ke.
sakhi ki dil se nikli daad kubul karein.
sakhi with daad


कुछ ऐसे पल जिनको संजोना है ,
शब्दों में पिरोना है , जिससे वो हमारी यादों में महकते रहे
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14th January 2007, 07:48 PM

sakhi ji.. maaf kijiyega aapne taarif ki rachna ki aur main aapka shukriya bhi adaa na kar paaya.. ... ek arsa ho gaya.. idhar aana hi nahi hua.. niji zindagi mein itna mashgool ho gaye hai ki fursat hi nahi hai.. aapne dil se padha aur taarif ki bahut bahut shukriya...




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