Shayri.com  

Go Back   Shayri.com > English/Hindi/Other Languages Poetry > Hindi Kavitayen

Reply
 
Thread Tools Rate Thread Display Modes
तुम्हारे बिना आरती का दीया यह gopaldas neeraj ji
Old
  (#1)
shakuntala vyas
Registered User
shakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to behold
 
Offline
Posts: 337
Join Date: Nov 2009
Rep Power: 20
तुम्हारे बिना आरती का दीया यह gopaldas neeraj ji - 8th August 2010, 03:26 AM

तुम्हारे बिना आरती का दीया यह
न बुझ पा रहा है न जल पा रहा है।


भटकती निशा कह रही है कि तम में
दिए से किरन फूटना ही उचित है,
शलभ चीखता पर बिना प्यार के तो
विधुर सांस का टूटना ही उचित है,
इसी द्वंद्व में रात का यह मुसाफिर
न रुक पा रहा है, न चल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


मिलन ने कहा था कभी मुस्करा कर
हँसो फूल बन विश्व-भर को हँसाओ,
मगर कह रहा है विरह अब सिसक कर
झरा रात-दिन अश्रु के शव उठाओ,
इसी से नयन का विकल जल-कुसुम यह
न झर पा रहा है, न खिल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


कहाँ दीप है जो किसी उर्वशी की
किरन-उंगलियों को छुए बिना जला हो?
बिना प्यार पाए किसी मोहिनी का
कहाँ है पथिक जो निशा में चला हो!
अचंभा अरे कौन फिर जो तिमिर यह
न गल पा रहा है, न ढल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


किसे है पता धूल के इस नगर में
कहाँ मृत्यु वरमाल लेकर खड़ी है?
किसे ज्ञात है प्राण की लौ छिपाए
चिता में छुपी कौन-सी फुलझड़ी है?
इसी से यहाँ राज हर जिंदगी का
न छुप पा रहा है, न खुल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।






"
   
Reply With Quote
Old
  (#2)
mittal_pali
Webeater
mittal_pali is a splendid one to beholdmittal_pali is a splendid one to beholdmittal_pali is a splendid one to beholdmittal_pali is a splendid one to beholdmittal_pali is a splendid one to beholdmittal_pali is a splendid one to behold
 
mittal_pali's Avatar
 
Offline
Posts: 708
Join Date: Jun 2010
Location: Bathinda-Punjab-India
Rep Power: 16
10th August 2010, 11:41 PM

Achi kavita hai.....................


Pali Mittal
   
Reply With Quote
Old
  (#3)
parveen komal
devil ! forgive me
parveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to behold
 
parveen komal's Avatar
 
Offline
Posts: 927
Join Date: Jul 2010
Location: MUMBAI PATIALA
Rep Power: 19
11th August 2010, 01:31 AM

तुम्हारे बिना आरती का दीया यह
न बुझ पा रहा है न जल पा रहा है।


भटकती निशा कह रही है कि तम में
दिए से किरन फूटना ही उचित है,
शलभ चीखता पर बिना प्यार के तो
विधुर सांस का टूटना ही उचित है,
इसी द्वंद्व में रात का यह मुसाफिर
न रुक पा रहा है, न चल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


मिलन ने कहा था कभी मुस्करा कर
हँसो फूल बन विश्व-भर को हँसाओ,
मगर कह रहा है विरह अब सिसक कर
झरा रात-दिन अश्रु के शव उठाओ,
इसी से नयन का विकल जल-कुसुम यह
न झर पा रहा है, न खिल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


कहाँ दीप है जो किसी उर्वशी की
किरन-उंगलियों को छुए बिना जला हो?
बिना प्यार पाए किसी मोहिनी का
कहाँ है पथिक जो निशा में चला हो!
अचंभा अरे कौन फिर जो तिमिर यह
न गल पा रहा है, न ढल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


किसे है पता धूल के इस नगर में
कहाँ मृत्यु वरमाल लेकर खड़ी है?
किसे ज्ञात है प्राण की लौ छिपाए
चिता में छुपी कौन-सी फुलझड़ी है?
इसी से यहाँ राज हर जिंदगी का
न छुप पा रहा है, न खुल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।
Amazing keep it up


07666027379,09041116001,09876442643,
09417142513,09914097007,09625494246
Mail: parveenkomal@parveenkomal.com
www.parveenkomal.com/blog
{ BURA NA SUNENGE BURA NA DEKHENGE BURA NA BOLENGE
ACHHA LIKHENGE,KOI BURA KAHEGA TO KHUD KO TATOLENGE }


Wohi rizq deta jahaan ko , wohi zaat sab se azeem hai
Meri muflisi pe na hans ke wo , tera taaj sar se giraa na de
}QadeerToopchi{
  Send a message via Yahoo to parveen komal Send a message via MSN to parveen komal Send a message via Skype™ to parveen komal 
Reply With Quote
Old
  (#4)
shakuntala vyas
Registered User
shakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to beholdshakuntala vyas is a splendid one to behold
 
Offline
Posts: 337
Join Date: Nov 2009
Rep Power: 20
11th August 2010, 04:36 PM

Quote:
Originally Posted by parveen komal View Post
तुम्हारे बिना आरती का दीया यह
न बुझ पा रहा है न जल पा रहा है।


भटकती निशा कह रही है कि तम में
दिए से किरन फूटना ही उचित है,
शलभ चीखता पर बिना प्यार के तो
विधुर सांस का टूटना ही उचित है,
इसी द्वंद्व में रात का यह मुसाफिर
न रुक पा रहा है, न चल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


मिलन ने कहा था कभी मुस्करा कर
हँसो फूल बन विश्व-भर को हँसाओ,
मगर कह रहा है विरह अब सिसक कर
झरा रात-दिन अश्रु के शव उठाओ,
इसी से नयन का विकल जल-कुसुम यह
न झर पा रहा है, न खिल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


कहाँ दीप है जो किसी उर्वशी की
किरन-उंगलियों को छुए बिना जला हो?
बिना प्यार पाए किसी मोहिनी का
कहाँ है पथिक जो निशा में चला हो!
अचंभा अरे कौन फिर जो तिमिर यह
न गल पा रहा है, न ढल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।


किसे है पता धूल के इस नगर में
कहाँ मृत्यु वरमाल लेकर खड़ी है?
किसे ज्ञात है प्राण की लौ छिपाए
चिता में छुपी कौन-सी फुलझड़ी है?
इसी से यहाँ राज हर जिंदगी का
न छुप पा रहा है, न खुल पा रहा है।


तुम्हारे बिना आरती का दिया यह
न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।
Amazing keep it up
thanks a lot

sada khush raho
   
Reply With Quote
Reply

Thread Tools
Display Modes Rate This Thread
Rate This Thread:

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

BB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off

Forum Jump



Powered by vBulletin® Version 3.8.5
Copyright ©2000 - 2019, Jelsoft Enterprises Ltd.
vBulletin Skin developed by: vBStyles.com