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तलाश-ऐ-यार......
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Dev Kumar
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Love तलाश-ऐ-यार...... - 18th July 2017, 11:25 PM



ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

इम्तिहान-ऐ-सब्र भी और गम-ऐ-दिल को खुशामदिन
चर्चा-ऐ-यार और शेखी मोहोब्बत की
कभी हम गुमशुदा तो कभी ये दिल गुमशुदा
हर जगह होती बातें ग़ुरबत की

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

न हसीं सवेरे की कहानी, न ढलते शाम का किस्सा
सबकी जुबां पर सिर्फ हमारे नाम का किस्सा
कोई समझता सोहरत-ऐ-इश्क़, कुछ ने मजहब-ऐ-दिल कहा इसको
किसी की निग़ाह में नफरत-ऐ-आंसू, किसी में खुसी का खज़ाना

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

दो पहलू दिखे इस मोहोब्बत के हमको
अच्छी और बुराई दोनों से पला पड़ा
कुछ ने डराया हमें सूली का नाम ले कर
कुछ ने हमें शक्श-ऐ-बुज़दिल कहा

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

अरमान-ऐ-दिल कुछ बैरंग मिले थे
कुछ खुवाइशों का जैसे इंतकाल हुआ
गुनाह-ऐ-खास था ये सबकी नज़र में
कुछ का फैसला हमारे हक़ में हुआ

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको.!!

देव कुमार
   
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Madhu 14
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19th July 2017, 08:08 AM

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Originally Posted by Dev Kumar View Post


ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

इम्तिहान-ऐ-सब्र भी और गम-ऐ-दिल को खुशामदिन
चर्चा-ऐ-यार और शेखी मोहोब्बत की
कभी हम गुमशुदा तो कभी ये दिल गुमशुदा
हर जगह होती बातें ग़ुरबत की

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

न हसीं सवेरे की कहानी, न ढलते शाम का किस्सा
सबकी जुबां पर सिर्फ हमारे नाम का किस्सा
कोई समझता सोहरत-ऐ-इश्क़, कुछ ने मजहब-ऐ-दिल कहा इसको
किसी की निग़ाह में नफरत-ऐ-आंसू, किसी में खुसी का खज़ाना

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

दो पहलू दिखे इस मोहोब्बत के हमको
अच्छी और बुराई दोनों से पला पड़ा
कुछ ने डराया हमें सूली का नाम ले कर
कुछ ने हमें शक्श-ऐ-बुज़दिल कहा

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको

अरमान-ऐ-दिल कुछ बैरंग मिले थे
कुछ खुवाइशों का जैसे इंतकाल हुआ
गुनाह-ऐ-खास था ये सबकी नज़र में
कुछ का फैसला हमारे हक़ में हुआ

ज़िन्दगी जो गुज़री हमारी, तलाश-ऐ-यार के खातिर
कुछ लोगो ने वाजिब कहा, तो कुछ ने आवारगी से नवाज़ा हमको.!!

देव कुमार

Achchi koshish Dev Kumar ji...likhte rahein....



अर्ज मेरी एे खुदा क्या सुन सकेगा तू कभी
आसमां को बस इसी इक आस में तकते रहे
madhu..
   
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Dev Kumar
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21st July 2017, 10:18 PM

Thanku so so much Madhu ji

Good eveng Madhu ji
   
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