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जो खुद से ही खफ़ा रहते हैं वो औरों को कब समझते
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Baghbaan
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जो खुद से ही खफ़ा रहते हैं वो औरों को कब समझते - 12th April 2019, 08:19 PM

जो खुद से ही खफ़ा रहते हैं वो औरों को कब समझते हैं
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो खुद में ही खोये रहते हैं l

जिन्हें खुद पर यकीं नहीं होता उन्हें सच भी दिखाई नहीं देता
वो झूठ के कन्धों पर चढ़कर फिर बार बार फिसलते हैं l

पीतल कितना भी चमक जाये वो सोना नहीं बन जाता है
जो आग में जल कर और निखरे सोना उसी को ही कहते हैं l

धागों जैसा ही नाज़ुक तो एहसास यकीं का होता है
इक बार कहीं ये टूटे जो फिर गांठों से ही जुड़ते हैं l

कितना कोई समझाए मगर खुद को ही समझना पड़ता है
भूला गर वापस आ जाये उसको यश भूला नहीं कहते हैं l

(जसपाल)
Baghbaan
   
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