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Marriage
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Firoz Sayyad
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Marriage - 28th January 2019, 03:58 PM

हरियाली छाई हैं, कालीसे फूल खिल रहे हैं
साल महीने यु गुजरते गए, उम्र बढ़ती गयी
लाड़ली देखो बिटिया रानी, एक दहलीज पार करनेको तैयार हो गयी
आज उसकी शादी हैं, बापका तो बस यही नसीब हैं
उंगलिको पकड़कर, इस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया

वो रौनक, वह चमक, वह धमक, जैसे जन्नतके नज़ारे
सितरोंसे आंगन भर गया, हसी मुस्कारहोटेने दिलोपे राज कर दिया
चाँदसा खिला चेहरा, यही नूरसे भरपूर मिल गया
दुल्हन बनी बिटया रानी, हो गई अब उसकी शादी
एक घरसे दूसरे घरकी, बन जाएगी अब वह लाड़ली

आयी उसके बिदाईकी रस्मे, छा गया एक सन्नाटा सा
आंखे भर आये सारी, उसे रुखसत करना बाकि है अभी
इस घरमे वह चहकती थी, वह उमड़ती थी
घरका हर कोना, रो उठा उसकी यादोंमें जैसे
कहते रहे सभी, अलबिदा अलबिदा, किसीके दिल तो किसीके आंखोंसे आँसू

क्या यह भी उपरवाले ने रीत बनाई, बेटी को बापसे जुदा किया
बेटा तो अभी राजकुमारसा बन बैठा, माँ बापके दिलोकि धड़कनसा
बेटी की कमी हम देखे, कभी बहुमें तो कभी बहनोंमें
बेटी ब्याह होकर चली गयी, दूर तो अब सही, फिरभी दिलके पासही सही .......................

--- फ़िरोज़ सय्यद


Main Jindagi hoon teri,
tuzhe pata nahin.
Tum taqdir hon meri,
mujhe khabar nahin.
   
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