Shayri.com

Shayri.com (http://www.shayri.com/forums/index.php)
-   Ghazal Section (http://www.shayri.com/forums/forumdisplay.php?f=14)
-   -   हां कह कर फिर साथ न देने से अच्छा है ना कह देन (http://www.shayri.com/forums/showthread.php?t=80438)

Baghbaan 6th June 2019 05:44 PM

हां कह कर फिर साथ न देने से अच्छा है ना कह देन
 
हां कह कर फिर साथ न देने से अच्छा है ना कह देना
झूठे वादों पर रहने से बेहतर है कुछ खुद कर लेना l

कोई भुलाए या कोई रुलाये शिकवा कभी ना उनसे करना
वक़्त का सारा खेल है यारों आज ख़ुशी तो कल ग़म सहना l

मंदिर मस्ज़िद गिरिजा जाते फूल चढाते सिर को झुकाते
एक है मालिक जिसने जाना उसने माना दिल का कहना l

होश गवां कर जिनको भुलाया होश में आये तो कुछ ना पाया
जाने वाले कब मुड़ते हैं फिर चाहे बरसे नितदिन नैना l

बस इतना यश याद यह रखना चाहे पराया हो या अपना
देकर तुम कुछ आस ना रखना इक फ़क़ीर का है ये कहना l


(जसपाल)
Baghbaan


All times are GMT +5.5. The time now is 01:38 AM.

Powered by vBulletin® Version 3.8.5
Copyright ©2000 - 2021, Jelsoft Enterprises Ltd.