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-   -   चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये (http://www.shayri.com/forums/showthread.php?t=77681)

NakulG 19th August 2014 12:27 PM

चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये
 
तेरी तसवीर से चिलमन को हटाया जाये ,
चलो कुछ देर चराग़ों को "जलाया" जाये !!

बहुत सजाये हैं, बहारों में गुलशन,
चलो इस बार, सेहरा को सजाया जाये !!

मुझे सीरत मेरी दिखाते हैं ये लोग,
चलो आईना, अब आईनों को दिखाया जाये !!

पथ्थरों को बहुत पिला के देखा है ,
चलो पानी, परिन्दों को पिलाया जाये !!

ज़ख्मों को लिए मयकदे में आये हैं ,
"चलो मरहम तबीबों को लगाया जाये"!!

खता की जड़ में आख़िर रखा क्या है,
चलो, रूठे हबीबों को मनाया जाये !!

खो कर पाना, पा के खोना ही है हयात,
चलो, के घर रकीबों का बसाया जाये !!

बहुत सताया है, इस लंबे सफर ने ,
चलो, अब मंज़िलों को थकाया जाये !!

बहुत तड़पी हैं ये आँखें रिस रिस कर,
चलो पानी को शोलों से मिलाया जाये !!

चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये !!

mujib66 22nd August 2014 11:35 AM

Wah..pehli baar itni achhi ghazal main ne padhi hai
patharon ko bohut pilaya ke dekha hai.....eh sher to sach much dil ko chu gaya.

Jee chahata hai ke mehfil men aapki amad ka bharpur kher maqdam karun.

kisi ghazal ka ek matla aur ek sher pesh kar raha hun.

apna gham lekar kahin aur na jaya jaye
ghar men bikhri hui cheezon ko sajaya jaye

ghar se masjid hai bohut door chalo yun karlen
kisi rote hue bachhe ko hansaya jaye.



Mubarak ho nakulG.

NakulG 24th August 2014 04:07 PM

Shukriya Mujib ji!!

tahe dil se shukriya!!
Koshish rahegi ki aap jaise chahne walon ke liye achhe qalam laa sakoon.
Aap taq apne jazbaat pahuncha sakun, aapke jazbaat tak pahunch sakoon!!

khush rahiye

Nakul

Quote:

Originally Posted by mujib66 (Post 465981)
Wah..pehli baar itni achhi ghazal main ne padhi hai
patharon ko bohut pilaya ke dekha hai.....eh sher to sach much dil ko chu gaya.

Jee chahata hai ke mehfil men aapki amad ka bharpur kher maqdam karun.

kisi ghazal ka ek matla aur ek sher pesh kar raha hun.

apna gham lekar kahin aur na jaya jaye
ghar men bikhri hui cheezon ko sajaya jaye

ghar se masjid hai bohut door chalo yun karlen
kisi rote hue bachhe ko hansaya jaye.



Mubarak ho nakulG.


NakulG 4th September 2014 11:33 AM

Shukriya Nazeen Ji!!
Bahut bahut achha laga ki aapne itni koshish kee..
tahe dil se shukriya!!

Haan, Ye ghazal ke sabhi rules follow nahi karti!!
Isse urdu me kavita kah sakte hain!!

zainy 4th September 2014 11:58 AM

Wah bohat khoob Nakul ji. ...sabhi ashaar laajawaab hain

@Naaz ..thanks for the roman hindi translation..:)

NakulG 4th September 2014 12:03 PM

Honsala badhane ke liye shukriya Zaini Jee!!

Hassan 4th September 2014 04:13 PM

Quote:

Originally Posted by NakulG (Post 465684)
तेरी तसवीर से चिलमन को हटाया जाये ,
चलो कुछ देर चराग़ों को "जलाया" जाये !!

बहुत सजाये हैं, बहारों में गुलशन,
चलो इस बार, सेहरा को सजाया जाये !!

मुझे सीरत मेरी दिखाते हैं ये लोग,
चलो आईना, अब आईनों को दिखाया जाये !!

पथ्थरों को बहुत पिला के देखा है ,
चलो पानी, परिन्दों को पिलाया जाये !!

ज़ख्मों को लिए मयकदे में आये हैं ,
"चलो मरहम तबीबों को लगाया जाये"!!

खता की जड़ में आख़िर रखा क्या है,
चलो, रूठे हबीबों को मनाया जाये !!

खो कर पाना, पा के खोना ही है हयात,
चलो, के घर रकीबों का बसाया जाये !!

बहुत सताया है, इस लंबे सफर ने ,
चलो, अब मंज़िलों को थकाया जाये !!

बहुत तड़पी हैं ये आँखें रिस रिस कर,
चलो पानी को शोलों से मिलाया जाये !!

चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये !!

Quote:

Originally Posted by N@zneen (Post 467416)
Nakul g is behtareen ghazal ko sab padh sakeiN aur saraH sakeiN isliye roman meiN convert kar rahi huN
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

तेरी तसवीर से चिलमन को हटाया जाये ,
चलो कुछ देर चराग़ों को "जलाया" जाये !!

Terii tasveer se chilman ko hatayaa jaye,
Chalo kuch der charagoN ko 'jalayaa' jaye!!

बहुत सजाये हैं, बहारों में गुलशन,
चलो इस बार, सेहरा को सजाया जाये !!

Bahot sajayeiN haiN baharoN meiN gulshan,
Chalo is baar sehraa ko sajayaa jaye!!

मुझे सीरत मेरी दिखाते हैं ये लोग,
चलो आईना, अब आईनों को दिखाया जाये !!

Mujhe seerat merii dikhateiN haiN ye log,
Chalo aaeenaa, ab aaeenoN ko dikhayaa jaye!!

पथ्थरों को बहुत पिला के देखा है ,
चलो पानी, परिन्दों को पिलाया जाये !!

Pat'tharoN ko bahot pilaa key dekha hai,
Chalo paanii parindoN ko pilayaa jaye!!

ज़ख्मों को लिए मयकदे में आये हैं ,
"चलो मरहम तबीबों को लगाया जाये"!!

ZakhmoN ko liye maikade meiN aaye haiN,
"Chalo marham tabeeboN ko lagayaa jaye"!!

खता की जड़ में आख़िर रखा क्या है,
चलो, रूठे हबीबों को मनाया जाये !!

Khataa kii jad meiN aakhir rakha kya hai,
Chalo roothey habeeboN ko manayaa jaye!!

खो कर पाना, पा के खोना ही है हयात,
चलो, के घर रकीबों का बसाया जाये !!

Kho kar paanaa, paa key khonaa hii hai hayaat,
Chalo key ghar rakeeboN ka basayaa jaye!!

बहुत सताया है, इस लंबे सफर ने ,
चलो, अब मंज़िलों को थकाया जाये !!

Bahot satayaa hai is lambey safar ney,
Chalo ab manziloN ko thakayaa jaye!!

बहुत तड़पी हैं ये आँखें रिस रिस कर,
चलो पानी को शोलों से मिलाया जाये !!

Bahot tadapii haiN ye aankheiN ris ris kar,
Chalo paanii ko sholoN sey milayaa jaye!!

चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये !!

Chalo kuch der charagoN ko jalayaa jaye!!

waaaaahhh! waaaahhh!

Nakul jee,

Bohat umdaH ashaarooN se tarteep ki hui yeH
aala-tareen peshkash mujhe bohat pasand aayi... :)

Aur Naaz, bohat bohat shukriyaaH roman-Urdu translation
ke liye... warna maiN hindi na samajh paata..... aur yeH
behtareen kaawish meri nazrooN se chhot jati..

Reps added, aise hi meHfil ko rangeen karte rahiye,,

DuaooN ke saath,,

NakulG 4th September 2014 06:17 PM

Honsala badhane ke liye tahe dil se shukriya Hassan Saheb


Quote:

Originally Posted by Hassan (Post 467565)
waaaaahhh! waaaahhh!

Nakul jee,

Bohat umdaH ashaarooN se tarteep ki hui yeH
aala-tareen peshkash mujhe bohat pasand aayi... :)

Aur Naaz, bohat bohat shukriyaaH roman-Urdu translation
ke liye... warna maiN hindi na samajh paata..... aur yeH
behtareen kaawish meri nazrooN se chhot jati..

Reps added, aise hi meHfil ko rangeen karte rahiye,,

DuaooN ke saath,,


ananthpak 4th September 2014 07:34 PM

Quote:

Originally Posted by NakulG (Post 465684)
तेरी तसवीर से चिलमन को हटाया जाये ,
चलो कुछ देर चराग़ों को "जलाया" जाये !!
बहुत सजाये हैं, बहारों में गुलशन,
चलो इस बार, सेहरा को सजाया जाये !!
मुझे सीरत मेरी दिखाते हैं ये लोग,
चलो आईना, अब आईनों को दिखाया जाये !!
पथ्थरों को बहुत पिला के देखा है ,
चलो पानी, परिन्दों को पिलाया जाये !!
ज़ख्मों को लिए मयकदे में आये हैं ,
"चलो मरहम तबीबों को लगाया जाये"!!
खता की जड़ में आख़िर रखा क्या है,
चलो, रूठे हबीबों को मनाया जाये !!
खो कर पाना, पा के खोना ही है हयात,
चलो, के घर रकीबों का बसाया जाये !!
बहुत सताया है, इस लंबे सफर ने ,
चलो, अब मंज़िलों को थकाया जाये !!
बहुत तड़पी हैं ये आँखें रिस रिस कर,
चलो पानी को शोलों से मिलाया जाये !!
चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये !!

Waaaaaahhhhhh!!!! Kya baat hai Nakul ji...bohat achhe...padh kar maza aa gaya...bohat saari subhkaamnayein :)

NakulG 4th September 2014 09:07 PM

honsala badhane ke liye Bahut bahut shukriya!!
koshish rahegi kuchh ghazalaen bhi jald pesh kar sakoon


Quote:

Originally Posted by ananthpak (Post 467589)
Waaaaaahhhhhh!!!! Kya baat hai Nakul ji...bohat achhe...padh kar maza aa gaya...bohat saari subhkaamnayein :)


Pankaj Mishra 8th September 2014 01:05 PM

Waah.......Nakul ji bahut behtareen........
Mohobbat ne hamse kuch maanga nahi tha !
Rafta-rafta ham hi unki baaton me aa gaye........!!!!!

sunita thakur 8th September 2014 02:30 PM

[QUOTE=NakulG;465684]तेरी तसवीर से चिलमन को हटाया जाये ,
चलो कुछ देर चराग़ों को "जलाया" जाये !!

बहुत सजाये हैं, बहारों में गुलशन,
चलो इस बार, सेहरा को सजाया जाये !!

मुझे सीरत मेरी दिखाते हैं ये लोग,
चलो आईना, अब आईनों को दिखाया जाये !!

पथ्थरों को बहुत पिला के देखा है ,
चलो पानी, परिन्दों को पिलाया जाये !!

ज़ख्मों को लिए मयकदे में आये हैं ,
"चलो मरहम तबीबों को लगाया जाये"!!

खता की जड़ में आख़िर रखा क्या है,
चलो, रूठे हबीबों को मनाया जाये !!

खो कर पाना, पा के खोना ही है हयात,
चलो, के घर रकीबों का बसाया जाये !!

बहुत सताया है, इस लंबे सफर ने ,
चलो, अब मंज़िलों को थकाया जाये !!

बहुत तड़पी हैं ये आँखें रिस रिस कर,
चलो पानी को शोलों से मिलाया जाये !!

चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये !![/QUOTE/]

Nakul ji......behad khoobsurat ahsaas lge aapne, kisi aik sher ki tareef nahi kar sakti, sabhi sher tareef ke kabil hai...!

NakulG 8th September 2014 04:29 PM

Honsala badhane ke liye shukriya Sunita Ji!!

[QUOTE=sunita virender;467957]
Quote:

Originally Posted by NakulG (Post 465684)
तेरी तसवीर से चिलमन को हटाया जाये ,
चलो कुछ देर चराग़ों को "जलाया" जाये !!

बहुत सजाये हैं, बहारों में गुलशन,
चलो इस बार, सेहरा को सजाया जाये !!

मुझे सीरत मेरी दिखाते हैं ये लोग,
चलो आईना, अब आईनों को दिखाया जाये !!

पथ्थरों को बहुत पिला के देखा है ,
चलो पानी, परिन्दों को पिलाया जाये !!

ज़ख्मों को लिए मयकदे में आये हैं ,
"चलो मरहम तबीबों को लगाया जाये"!!

खता की जड़ में आख़िर रखा क्या है,
चलो, रूठे हबीबों को मनाया जाये !!

खो कर पाना, पा के खोना ही है हयात,
चलो, के घर रकीबों का बसाया जाये !!

बहुत सताया है, इस लंबे सफर ने ,
चलो, अब मंज़िलों को थकाया जाये !!

बहुत तड़पी हैं ये आँखें रिस रिस कर,
चलो पानी को शोलों से मिलाया जाये !!

चलो कुछ देर चराग़ों को जलाया जाये !![/QUOTE/]

Nakul ji......behad khoobsurat ahsaas lge aapne, kisi aik sher ki tareef nahi kar sakti, sabhi sher tareef ke kabil hai...!



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