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ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका
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Sham Kumar
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ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका - 11th October 2012, 06:22 PM

ना फिकर ना फाका न मुन्नी न काका
अज उठदे सवेरे इ एह धियान आया,

एस उमरे सुरजीते, ओह तूँ , करनी की माया,

तूँ बच्चे विअहा लए, खुश अपने कमों कंमी,

हो गए रब्ब नू पियारे ने भापा ते मम्मी,

जो रह गईया बाकी, सोच ओह्न्दी तू झलिया,

ऐवें वेहले उदासी दा, पासा कियों मलिया,

सोच आंदे इ आखिया, ओ मेरी चन्नी,

लाह दे जिंद तों सब, जुम्मेवारी दी कन्नी,

फड़ खुशिया दा पल्ला, हुन लाह दे सब झाका,

ओये हुन नहिओं जीना ते, कदों है जीना,

किओंकीहुन..............

ना फिकर ना फाका, ना मुन्नी ना काका.



बोली चन्नी वे दिन याद बचपन दे औंदे,

कोई गल्ल, हुन्दी ना हुन्दी, ऐवें हस्सी जांदे,

याद औंदे ने गीहटे, हाय वे, लुकन मीह्टी,

ओ नीं, रस्सी दा टप्पना, शटापू दी गीह्टी,

बोल पैंदे कदी सां, कदी हुन्दी कट्टी,

ओ गोली संतरे दी, ओह भाईये दी हट्टी,

ओह भठी दे दाने, जा के भुनाने,

ओह दियोडी चरखा, ओह गिद्धे ओह गाने,

ओह बोली, ओह हास्सा, खूब धूम धडाका,

ओही सी जीना, फ़िर ओही जीना,

किओंकी हुन..............

ना फ़िकर ना फ़ाका, ना मुन्नी ना काका,



बचपन दी बल्ली ते, जवानी दा सिट्टा,

जदों लगा सी, लगा सी डाढा मिठा,

मन मारे उडारी, सोहने सपने परोयिया,

की दस्सां दिल दी हालत, जद कालज होइया,

पैएंट दी कई कई वारी, करीज़ बिठा के,

भुआ लन्दन तों लिअहाई, ओह सेन्ट लाके,

सिधे कंटीन कालज दी, लांदे सी डेरा,

अखां लभदीयां रैहनदियाँ, कोई सोहनी कुड़ी नूं,

जाके बैहना, जवानी बहाना बथेरा,

बड़ी मस्ती सी कीती, बड़ा वेला सी चंगा,

रब्बा शुक्र है तेरा, तेतों, होर की मँगा,

भेज दित्ता तू चन्नी, सोहनी, सियानी,

फ़िर शुरू हो गयी, इक नवीं कहानी,

हुँदै, हस्स हस्स के कमले, हुन्दी परवाह ना कोई,

बस रहीये हुन कठे, होर रही चाह ना कोई,

शौक खाने दा दोहना दा ईको जेहा सी,

खांदे आलू परांठे सी मार पचाका,

ओही सी जीना, हुन फ़िर ओही जीना,

किओंकी हुन..............

ना फ़िकर ना फ़ाका, ना मुन्नी ना काका,


तूं पैनहंटा दी होई, मैं ठाहटाआँ दा होइया,

भावें गहलां टिबे, ते अखां टोएया,

दंद थोड़े जये रह गए, हथ होए पोले पोले,

गोले गप्पे तां आप्पां खाने जरूरी,

खाली पानी सई, नहीं पुंवांवांगे छोले,

छड दुनिया दी नहीओं, परवाह करनी,

जे लैनीचन्नी तूं, रब्ब दी दुआ लै,

वंडी जा, वंडी जा, वंडी जा, वंडी जा,

खुशीआं दा वहडा, तूं नोट भनालै,

तूं हो जावें बुढी, मैं जावाँ बुढा,

भावें जीवन दा हौली, चलन लगे गड्डा,

एह दिल तों मैं कहना, तूं सुन मेरी चंनिए,

तूं मैंनू तां लगेंगी फ़िर वी पटाका,

ओये हुन नहिओं जीना ते कदों जीना,

किओंकी हुन..............

ना फ़िकर ना फ़ाका, ना मुन्नी ना काका.

ना फ़िकर ना फ़ाका, ना मुन्नी ना काका.

शामकुमार

Last edited by Sham Kumar; 11th October 2012 at 06:38 PM..
   
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